🧊 AC या कूलर नहीं, ताजी ठंडक की देसी असली जुगाड़ (अनुभव है यह)
✍️ कविता ओशो
देसी ठंडक
🪑 देसी कूलर :
मुझे AC पसंद नहीं है।
क्योंकि जब खिड़की-दरवाज़े बंद कर देते हैं, तो लगता है जैसे हम एक डिब्बे में बैठ गए हों। ना ताज़ी हवा, ना बाहर की कोई झलक — जैसे कोई बंद एसी कोच में सफ़र कर रहे हों।
हाँ, हवा थोड़ी ठंडी लगती है, पर जैसे ही बाहर निकलो… लगेगा जैसे किसी ने लू की चादर उढ़ा दी हो।
तो मैंने क्या किया?
एक देसी कूलर बना लिया।
कूलर यानी जिसे हर थोड़ी देर में पानी देना पड़े, और बिजली का खर्चा भी आम आदमी के लिए भारी हो जाए — वो वाला नहीं।
मेरा देसी कूलर:
एक टेबल फैन
एक कुर्सी
और एक मोटा तौलिया या भीगा कपड़ा।
कैसे काम करता है?
टेबल फैन को कुर्सी पर रख दिया।